परिभ्रमण त्रिज्या की परिभाषा क्या है , Radius of gyration definition
Radius of gyration definition परिभ्रमण त्रिज्या की परिभाषा क्या है ?
दृढ़ पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण तथा परिभ्रमण त्रिज्या (Moment of Inertia and Radius of Gyration of a Rigid Body)
किसी अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति करते पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण, उस पिण्ड के द्रव्यमान साथ-साथ धूर्णन अक्ष के सापेक्ष द्रव्यमान वितरण (यानि अक्ष से विभिन्न द्रव्यमान कणों की दूरियाँ भी निर्भर करता है। अतः यदि एक ऐसे बिन्दु की कल्पना करें जिस पर वस्तु का द्रव्यमान M केन्द्रित मान लें तथा उसकी घूर्णन अक्ष से ऐसी प्रभावी दूरी (effective distance)K लें कि घूर्णन अक्ष के सापेक्ष वही जड़त्व आघूर्ण प्राप्त हो जो वास्तविक द्रव्यमान वितरण से प्राप्त होता है, तो अभीष्ट बिन्दु की घर्णन अक्ष से प्रभावी दूरी (effective distance) को घूर्णन त्रिज्या (radius of gyration) कहते हैं।
अतः I = MK2 = Σ mi ri2
K = Σ (mi ri2)M
इससे स्पष्ट है कि, घूर्णन करते किसी पिण्ड की परिभ्रमण त्रिज्या (radius of gyration) उसके घूर्णन अक्ष से वह दूरी है जिसके वर्ग का द्रव्यमान से गुणनफल, पिण्ड के जड़त्व आघूर्ण के बराबर होता है।
किसी पिण्ड की घूर्णन त्रिज्या K का मान मुख्यतः घूर्णन अक्ष की दिशा एवं स्थिति पर, तथा घूर्णन अक्ष के सापेक्ष पिण्ड के द्रव्यमान वितरण पर, निर्भर करता है।
यदि M द्रव्यमान का पिण्ड, जो अनेक कणों जिनके द्रव्यमान m1 m2, m3…….. हों, से मिल कर बना है तथा जो निश्चित अक्ष YY’ के सापेक्ष घूर्णन करता है तो घूर्णन अक्ष YY (चित्र(4) के सापेक्ष पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण
I = Σ (mi ri2 ) = mi ri2 + m2 r22 + …………..mn rn2
जहाँ r1, r2, r3 …….. पिण्ड के कणों की घूर्णन अक्ष से लम्बवत् दूरियाँ हैं।
इसके साथ ही I = Σ (mi ri2 ) = MK2
यहाँ K.घूर्णन अक्ष YY’ के सापेक्ष पिण्ड का घूर्णन त्रिज्या है।
जड़त्व आघूर्ण का मात्रक किग्रा-मीटर2 होता है।
यदि पिण्ड अविछिन्न बनावट (continuous structure) की बनी हो तो ‘ Σ ‘ चिन्ह को समाकलन चिन्ह से बदल सकते हैं जिससे जड़त्व आघूर्ण
I = r2 (dm)
यहाँ dm. पिण्ड के अनन्त सूक्ष्म अंश का द्रव्यमान है जो घूर्णन अक्ष से दूरी r दूरी पर स्थित है।
उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि यदि एक ही अक्ष के सापेक्ष सम्पूर्ण पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण । हो तथा उसका कोई छोटे टुकड़े का जड़त्व आघूर्ण I1 हो तो छोटे टुकड़े को पिण्ड से निकाल देने पर उसी अक्ष के प्रति शेष पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण I’ = I1 – I1, होगा।
स्पष्टतः जड़त्व आघूर्ण का मान, उस अक्ष की स्थित व विन्यास पर निर्भर करता है, जिसके सापेक्ष अभीष्ट दृढ़ पिण्ड घूर्णन कर रहा है। अब यदि घूर्णन अक्ष परिवर्तित हो जाय तो उस निकाय का जड़त्व आघूर्ण भी परिवर्तित हो जायेगा। अतः पिण्ड की घूर्णन अक्ष के परिवर्तित होने की दशा में उसका जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिये निम्न विवेचित प्रमेयों का उपयोग किया जता है
(a) समकोणिक अक्षों का प्रमेय
(b) समान्तर अक्षों का प्रमेय
(a) समकोणिक अक्षों का प्रमेय (Theorem of perpendicular axes)
किसी समतल पटल (lamina) का इसके तल के लम्बवत् अक्ष (perpendicular axis) के सापेक्ष जड़त्व इसके तल में स्थित दो पारस्परिक लम्बवत् अक्षों के सापेक्ष आघूर्णो के योग के तुल्य होता है जबकि अभीष्ट अक्ष दोनों लम्बवत् अक्षों के कटान बिन्दु से होकर गुजरती है।
यदि किसी समतल पटल के जड़त्व आघूर्ण दो समकोणिक अक्षों (OX व OY) के सापेक्ष Ix तथा IY हों तथा इनके कटान बिन्दु से गुजरने वाली तथा अभिलम्बवत् अक्ष (OZ) के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण Iz हो तो समकोणिक अक्षों के प्रमेय
Iz = Ix + Iy
मान लो Ox तथा OY पटल में दो समकोणिक अक्ष है। OZ-अक्ष पटल के लम्बवत् है और O से गुजरती है। बिन्दु P पर m द्रव्यमान का कोई कण स्थित है। OX के सापेक्ष पटल का जड़त्व आघूर्ण
Ix = Σ my2
इसी प्रकार OY अक्ष के सापेक्ष पटल का जडत्व आघूर्ण
Iy = Σ mx2
OZ के सापेक्ष पटल का जड़त्व आघूर्ण
Iz = Σ mr2 = Σ m(OP)2
= Σ m(x2 +y2) = Σ mx2 + Σ my2
Iz = IY + Ix
प्रत्येक पिण्ड घूर्णन अक्ष के लम्बवत् अनेक समतल पटलों में विभाजित किया जा सकता है। अतः उपरोक्त प्रमेय प्रत्येक पिण्ड के लिए यथार्थ होती है।